नीट छात्रा मौत मामले ने पकड़ा तूल, पटना के अवैध गर्ल्स हॉस्टल प्रशासन के रडार पर
बिहार की राजधानी पटना में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रहस्यमयी मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे ऐसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं, जो सिर्फ एक मामले तक सीमित नहीं रह जाते। एफएसएल रिपोर्ट के गंभीर संकेत, पुलिस की शुरुआती जांच में बरती गई लापरवाहियां और प्रशासनिक निगरानी की कमी ने अब पूरे बिहार में निजी गर्ल्स हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है
एफएसएल रिपोर्ट ने नीट छात्रा की मौत के मामले को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट में छात्रा के अंडरगारमेंट में सीमन पाए जाने की पुष्टि हुई है, जबकि हैरानी की बात यह है कि पुलिस ने जांच के लिए जो बेडशीट भेजी थी, वह पहले से धुली हुई थी। जांच में यह भी सामने आया है कि घटना के बाद हॉस्टल को समय पर सील नहीं किया गया और मौके से अहम साक्ष्य ठीक से नहीं जुटाए जा सके। इन चूकों को जांच प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। एफएसएल रिपोर्ट के सामने आते ही पटना से लेकर गया तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
पटना हॉस्टल कांड को लेकर गया जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। गयाजी के डीएम शशांक शुभंकर और एसएसपी सुशील कुमार ने जिले में संचालित सभी गर्ल्स हॉस्टल और लॉज की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए हैं। जिला मुख्यालय और अनुमंडलों में मौजूद हॉस्टलों की अपडेटेड सूची तैयार करने को कहा गया है। इसके साथ ही एक विशेष निरीक्षण समिति गठित करने का आदेश दिया गया है, जिसमें कम से कम एक महिला अधिकारी को शामिल किया जाएगा। यह समिति हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं की जांच कर अपनी रिपोर्ट सीधे डीएम कार्यालय को सौंपेगी।
वहीं, पटना के डीएम त्यागराजन एसएम ने बताया कि निजी हॉस्टलों का सर्वे दो दिन पहले ही शुरू कर दिया गया है। सभी एसडीओ को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित हॉस्टलों की जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। एक सप्ताह के भीतर प्रामाणिक आंकड़े सामने आने की उम्मीद है, जिसके बाद निरीक्षण और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी। डीएम ने यह भी माना कि अब तक कार्रवाई केवल शिकायत मिलने पर ही की जाती थी, लेकिन अब पहली बार सभी निजी हॉस्टलों का व्यापक सर्वे कर सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं की जांच की जाएगी।
पटना को बिहार का कोचिंग हब माना जाता है। कंकड़बाग, राजेंद्र नगर, मखनिया कुआं और बोरिंग रोड जैसे इलाकों में सैकड़ों निजी हॉस्टल चल रहे हैं। इनमें से कई हॉस्टल आवासीय मकानों को बदलकर संचालित किए जा रहे हैं, जहां फायर सेफ्टी, स्ट्रक्चरल सेफ्टी और जरूरी अनुमतियों का अभाव आम है। ऐसे में छात्राएं खास तौर पर असुरक्षित हालात में रहने को मजबूर हैं।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि प्रशासन, पुलिस और नगर निगम — किसी के पास भी निजी हॉस्टलों का पूरा और सटीक आंकड़ा मौजूद नहीं है। पटना पुलिस का कहना है कि उनके पास सिर्फ सरकारी या पंजीकृत हॉस्टलों की सूची है। वहीं नगर निगम के अनुसार करीब 3,100 इमारतें टैक्स रिकॉर्ड में हॉस्टल के रूप में दर्ज हैं, लेकिन वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है।
पुलिस भले ही छात्राओं की सुरक्षा के लिए ‘शक्ति सुरक्षा दल’ और पेट्रोलिंग टीमों का दावा कर रही हो, लेकिन यह व्यवस्था भी सीमित इलाकों तक ही प्रभावी नजर आती है। नीट छात्रा की मौत ने साफ कर दिया है कि निजी हॉस्टलों की बिखरी और अनियंत्रित व्यवस्था अब एक बड़े सुरक्षा संकट में बदल चुकी है।
Divya Singh